शुक्रवार, २४ जुलै, २०२०

६८ युवक

                                           ६८  युवक 

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       हे वीर आत्म्यांनो, ज्यांना बेड्यांनी जखडून टाकले आहे, त्यांना मुक्त करण्यासाठी, जे दुःखाच्या भाराने लादले गेले आहेत त्यांचे ओझे कमी करण्यासाठी आणि जे अज्ञानाच्या घनघोर अंधारात बुडून गेले आहेत अशांची हृदये प्रकाशित करण्यासाठी पुढे चला ! ऐका ! वेदांत डंका पिटून घोषणा करीत आहे ' अभिः ' निर्भय बना . ईश्वराची ही पवित्र वाणी पृथ्वीवरील सर्व प्राण्यांच्या हृदयाची तार छेडण्यास समर्थ होईल . 
                                                                                स्वामी विवेकानंद
          वेदांत म्हटले आहे ' अशिष्टो बलिष्टो दृढिष्टो मेधावी ' म्हणजेच ' दृढ, बलशाली, तीव्र बुद्धीची आणि चैतन्यशाली माणसेच ईश्वराजवळ पोहोचू शकतात. '  तुमचा भविष्यकाळ निश्चित करण्याची हीच वेळ आहे. म्हणून मी म्हणतो, आत्ताच या उसळत्या तारुण्यात, या नव्या उत्साहाचे वातावरण कार्य करा. काम करण्याची हीच वेळ आहे. आत्ताच आपल्या भाग्याचा निर्णय करा आणि कामाला लागा. कारण जे पुष्प अजून चुरगळलेले नाही, जे ताजे आहे, जे अद्याप हुंगले गेलेले नाही तेच ईश्वरचरणी अर्पण केले जाते. ईश्वर त्याचाच भुकेला असतो.                                         स्वामी विवेकानंद.

        कल्पना को कृती में आने के लिए हाथ पैरोंकी प्रमुखतः आवश्यकता होती है | ध्येयवादी कवि की कल्पना प्रत्यक्ष साकार करने के लिए तरुण आगे बढेंगे, तभी राष्ट्र का अभ्युदय होगा | एखाध कीर्तन का व्याख्यान कितना भी वीर रस प्रधान हो, वृद्ध जन उसकी प्रशंसा करके चुप बैठ जायेंगे | पर राष्ट्र का जीवन गरम रक्त के तरुणों पर ही अवलंबित होता है | छात्रवृत्ति के बगैर राष्ट्र जिंदा नही रह सकता | जो स्वयं का बचाव नहीं कर सकता, वह मनुष्य ही नहीं कायर है | इस कायरता से मुक्ती पाकर पौरुष का जो स्विकार करेगा उसी व्यक्ति अथवा उसी राष्ट्र को विश्व में प्रतिष्ठा प्राप्त होगी |                                                                                           लोकनायक बापूजी अणे

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