बुधवार, २२ जून, २०१६

१४ . लोकशाही

                           १४ . लोकशाही 
        लोकशाही हे लोकासंबंधीचे कर्तव्य पार पाडण्याचे केवळ एक साधन आहे . साधनाची प्रभाव क्षमता, लोकजीवनात राष्ट्राबद्धल आत्मियता, आपल्या जबाबदारीची जाणीव आणि शिस्त यावर अवलंबून आहे . 

         इस देश में सभी को नागरिकता के समान अधिकार हैं | तो सबके लिये समान कानून भी होना चाहिये | हम लोग जब इसकी आवश्यकता प्रतिपादित करते हैं, तो हमें सांप्रदायिक कहा जाता है | और जो संप्रदाय का विचार कर अपनी नीतियां बनाते है, वे राष्ट्रीय कहलाते हैं | जम्मू-काश्मीर के लिए बनी हुई 370 धारा समाप्त कर अन्य राज्यों के समान व राज्य भी होना चाहिये, ऐसी मांग हम करते हैं तो हम सांप्रदायिक बन जाते है और संप्रदाय विशेष की वहां पर बहुसंख्या होने के कारण वहां 370 धारा के तहत अलगाववाद  का पोषण करने वाले राष्ट्रीय कहलाते हैं | विपरीत सोच का ऐसा उदाहरण अपने देश के बाहर कहीं तो भी मिलेगा क्या ?                                    बाळासाहेब देवरस


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