१२८ नेतृत्व
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प्रवाह के साथ बहना नेता का नही, अनुयायी का लक्षण हैं | सच्चा नेता तो वह है जो अपने मत के अनुसार परिस्थिती को बदल कर लोकमत को अपने ओर आकृष्ट कर लेता है | नेतृत्व की कसौटी लोकमतानुवर्तित्व नहीं, लोकनियंत्रण है | अवसर पडने पर लोकमत के विरुद्ध जाने में भी न हिचकना ही सत्यनिष्ठा है | प. पू. हेडगेवार
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