बुधवार, २२ जून, २०१६

२९ . राष्ट्रीयता

                                २९  राष्ट्रीयता 

१ 
     आपल्या समाजाकडे मनुष्यबळ होते, धनभांडार होते,  शस्त्रे होती, परंतु मी या राष्ट्राचा घटक आहे म्हणून जीवनात राष्ट्रहिताला अग्रस्थान द्यावयास हवे . आणि जरूर पडल्यास आपले सर्वस्व राष्ट्रहितासाठी समर्पित करावयास हवे याची जाणीव नव्हती . म्हणून सर्व प्रकारे बलशाही असूनही आपला समाज परास्त झाला . म्हणून सर्वात आधी हिंदू समाजामध्ये ही राष्ट्रीय वृत्ती जागृत करून, त्याला संघटीत करण्याची आवश्यकता आहे .  
                                                                                                        - लक्ष्मणराव इनामदार 

२ 
      अपने देश में एक जन है। एक संस्कृति है।  एक राष्ट्र है।  हमारी यह मातृभूमि है, हम उसकी संतान है।  हम सब एक परिवार के सदस्य है।  राम-कृष्ण हमारे राष्ट्रीय पुरुष है।  वेद-उपनिषद्, रामायण- महाभारत आदि हमारे राष्ट्रीय ग्रंथ है। यहाँ के जो उत्सव है वे हमारे राष्ट्रीय उत्सव है। यहाँ की परंपरा राष्ट्रीय परंपरा है। उस शास्त्रीय विचार को लेकर हमने कहा है कि हिंदुत्व यही राष्ट्रीयत्व है। 

       प्रत्येक राष्ट्राचा स्वतःचा असा एक राष्ट्रीय विचार असतो. विश्वधारणेसाठी असा विचार असणे आवश्यक असते. ज्या दिवशी विश्वधारणेसाठी हा विचार अनुपयोगी होईल त्या दिवशी हा विचार करणारी व्यक्ती असो व राष्ट्र असो ते नष्ट होईल. दुःख, दैन्य, दारिद्र्य व देशांतर्गत, देशाबाहेरून अत्याचार होऊन सुद्धा हा देश जिवंत आहे. कारण या देशाचा राष्ट्रीय विचार विश्वधारणेसाठी आवश्यक आहे.                                                -  स्वामी विवेकानंद

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