रविवार, ७ डिसेंबर, २०२५

१५४ पंथ

                                                              १५४  पंथ 

        रिलिजन की मतांध कल्पना तथा राज्यसत्ता पादरीयों के हात में होने के कारण पाश्चात्य देशों ने बहुत सदियों तक कष्ट भोगे हैं | उक्त कल्पना से धर्म की हमारी कल्पना प्रकाश और अंधकार के समान भिन्न है | धर्म अथवा आध्यात्मिकता कोई अंधमत नही है अपितु संपूर्ण जीवन का एक दृष्टिकोन है | राजनीतिक अथवा आर्थिक क्षेत्रों के समान राष्ट्रजीवन का कोई अलग क्षेत्र नहीं है | आध्यात्मिकता हमारे दृष्टी में जीवन की एक व्यापक दृष्टी है, जिसे सामाजिक जीवन के सभी क्षेत्रों को अनुप्राणित और उन्नत कर उनके बीच समन्वय की स्थापना करनी चाहिये |                                                                                                                     श्री गुरुजी

            धर्मनिरपेक्षतेच्या चुकीच्या व्याख्येने आम्ही आपल्या नवयुवकांच्या पिढीला आपल्या गतकाळापासून वंचित केले असून भविष्याविषयी काहीच मार्गदर्शन केलेले नाही. ज्या कार्यास ते हातभार लावू शकतील अशी नवीन विश्वाची कसलीच कल्पना आम्ही त्यांच्यासमोर उभी केलेली नाही. अशा लोकांना अथवा मानव जातीलाही देता येईल असा काही संदेश आपणास जवळ नाही.                                                                           संपूर्णानंद

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