१६२ त्याग
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मुख्य बात है त्याग की, बिना त्याग के कोई भी अपना संपूर्ण अंत:करण उंडेलकर अन्यों के लिए कार्य नही कर सकता | त्यागी व्यक्ती सबको समान दृष्टी से देखता है और सब की सेवा में अपने आपको लगाता है | कोई भी बाधा सत्य, प्रेम और प्रामाणिकता को नही रोक सकती | क्या तुम प्रामाणिक और मृत्युपर्यंत निस्वार्थी हो ? तब डरो मत, मृत्यू से भी नहीं | स्वामी विवेकानंद
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