१५२ संन्याशी
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लोकमत परिष्कार का कार्य वही कर सकता है, जो लोकेषणाओं से ऊपर उठ चुका हो | भारत ने इसका समाधान खोज निकाला है | भारत ने इसका समाधान राज्य के हाथ से लोकमत निर्माण के साधन छीनकर किया है | लोकमत परिष्कार का कार्य है - वीतरागी द्वंद्वातीत संन्यासियों का | लोकमत के अनुसार चलने का काम है - राज्य का | संन्यासी सदैव धर्म के तत्वों के अनुसार जनता के ऐहिक एवं आध्यात्मिक समुत्कर्ष की कामना लेकर अपने वचनों एवं निरीह आचरण से जनजीवन के ऊपर संस्कार डालते रहते हैं, उन्हे धर्म की मर्यादाओं का ज्ञान करते रहते हैं | कोई लोभ और मोह न होने के कारण वे सत्य के उच्चारण सहज कर सकते हैं | लोकशिक्षा और लोक संस्कार के वही केंद्र हैं | शिक्षा और संस्कार से ही समाज के जीवनमूल्य बनते और सुदृढ होते हैं | इन मूल्यों को बांध रखने के बाद लोकेच्छा की नदी कभी अपने चटों को अतिक्रमण कर संकट का कारण नहीं बनेगी | पं. दीनदयाळ उपाध्याय
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