सोमवार, २७ जानेवारी, २०२५

१३३ वीर

                                                                        १३३ वीर 

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         वीर कौन है ? वीर वह है - जो अपने धर्म को समझता है और चिरंतन सत् तत्व के ज्ञान का और अति समृद्ध विजयी ऐहिक जीवन का अर्थात् अभ्युदय  और नि:श्रेयस का - संयोग है | इस महान धर्म का साक्षात्कार केवळ उन्हीं को हो सकता है, जो सद्गुण-संपन्न और वीरमनस्क हैं,  उनको नही जो कायर हैं,  कमजोर हैं | यह महान सत्य दुर्बलों के लिए नही है | केवल वीर, सबल, साहसी और ऐसे लोग सफल हो सकते हैं, जो दुनिया में किसी भी बात का सामना बिना विचलित हुए पुरी शक्ती के साथ, तथा अपने मन का पूर्ण संतुलन रखते हुए कर सकते हैं |        प. पू. श्रीगुरुजी



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