मंगळवार, २७ जून, २०२३

८५ महिला

                                                                          ८५  महिला 

१ 

    महिला परिवार और राष्ट्र के लिए प्रेरक शक्ति है | जब तक यह बल नहीं जागता, समाज प्रगति नहीं कर सकता है |                                          -लक्ष्मीबाई केळकर 

८४ आंदोलन

                                                                ८४  आंदोलन 


संघस्थापनेपासून आजपर्यंतच्या वाटचालीत महत्वाच्या राष्ट्रीय प्रश्नांवर संघ स्वयंसेवकांनी वेळोवेळी केलेली अभियाने, जनजागरण मोहिमा, जनमत निर्मितीसाठी योजलेली प्रचार अभियाने यांचा संघाच्या लोकप्रियतेत मोठा वाटा आहे. नैसर्गिक वा मानवनिर्मित संकटांमध्ये तसेच राष्ट्रजीवनाच्या विविध अंगांमध्ये स्वयंसेवकांनी बजावलेल्या भूमिकांमुळे कोट्यावधी भारतीयांची मने राष्ट्रप्रेमाने भारुन टाकणाऱ्या चळवळी देशात उभ्या राहिल्या आहेत. 

                                                                                       - हो. वे. शेषाद्री

८३ मनुष्य निर्माण

                                                                            ८३ .  मनुष्य निर्माण 


      प्रत्येक सामाजिक संघटन प्रत्यक्ष वा अप्रत्यक्ष रूपाने मनुष्य निर्माण करण्यावरच जोर देत आहे. संपूर्ण मानवी प्रयत्नांमध्ये मनुष्य निर्माण हाच आधारभूत हेतू आहे. सुयोग्य व्यक्ती तयार झाल्याने समाज आणि राष्ट्र सुद्धा पूर्ण रूपाने तयार होईल. एक जुनी म्हण आहे. ' पै पै ची चिंता करा की रुपया आपोआप तयार होईल ' राष्ट्राची किंवा विश्वाची निर्मिती असो, सुयोग्य व्यक्ती निर्माण होणे हीच आधारभूत प्रक्रिया आहे. मनुष्याची चिंता कराल तर समाजही आपल्या स्वतःची चिंता करील. इतर सर्व व्यवस्था आणि साधने मग गौण आहेत.                     - श्री. एकनाथजी रानडे

                                                          

८२ . विल्हन वोन हम्बोल्ट

 ८२ . विल्हन वोन हम्बोल्ट


१ 

गीता एक अत्यंत सुन्दर और संभवतः एकमात्र सच्चा दार्शनिक ग्रन्थ है जो किसी अन्य भाषा में नहीं | वह एक ऐसी गहन और उन्नत वस्तु है, जिस पर सारी दुनिया गर्व कर सकती है |

८१ . मार्क ट्वेन

 ८१ . मार्क ट्वेन


१ 

मनुष्य के इतिहास में जो भी मूल्यवान और सृजनशील सामग्री है, उसका भंडार अकेले भारत में है 

८० . मैक्स मुलर

 ८० . मैक्स मुलर 


यदि मुझसे कोई पूछे की किस आकाश के तले मानव मन अपने अनमोल उपहारों समेत पूर्णतया विकसित हुआ है, जहां जीवन की जटिल समस्याओं का गहन विश्लेषण हुआ और समाधान भी प्रस्तुत किया गया, जो उसके भी प्रसंशा का पात्र हुआ जिन्होंने प्लेटो और कांट का अध्ययन किया,तो मैं भारत का नाम लूँगा |


७९. रोमां रोलां (फ्रांस)

 ७९. रोमां रोलां (फ्रांस)  


मानव ने आदिकाल से जो सपने देखने शुरू किये, उनके साकार होने का इस धरती पर कोई स्थान है, तो वो है भारत |